Bihari Ke Dohe Class 10 Hindi Summary – बिहारी के दोहे अर्थ सहित

Bihari Ke Dohe Class 10 Summary

बिहारी का जीवन परिचय- Bihari Ka Jivan Parichay: बिहारीलाल का जन्म 1595  ग्वालियर में हुआ। उनके पिता का नाम केशवराय था। जब बिहारी 8 वर्ष के थे तब इनके पिता इन्हे ओरछा ले आये तथा उनका बचपन बुंदेलखंड में बीता। इन्होने आचार्य केशवदास अपनी काव्य शिक्षा प्राप्त की ।

बिहारी को ज्योतिष, वैद्यक, गणित, विज्ञान आदि विविध विषयों का बड़ा ज्ञान था। अतः उन्होंने अपने दोहों में उसका खूब उपयोग किया है। बिहारी सतसई ग्रंथ ने उन्हें हिंदी साहित्य में अमर कर दिया।

इन्होंने श्रृंगार के संयोग और वियोग दोनों ही पक्षों का वर्णन किया है। संयोग पक्ष में बिहारी ने हावभाव और अनुभवों का बड़ा ही सूक्ष्म चित्रण किया हैं। उसमें बड़ी मार्मिकता है। कृति-चित्रण में बिहारी किसी से पीछे नहीं रहे हैं। षट ॠतुओं का उन्होंने बड़ा ही सुंदर वर्णन किया है।

बिहारी की भाषा साहित्यिक ब्रज भाषा है। बिहारी का शब्द चयन बड़ा सुंदर और सार्थक है।

बिहारी के दोहे का भावार्थ- Bihari Ke Dohe Summary : बिहारी के दोहे में प्रस्तुत इन पंक्तियों में बिहारी लाल ने श्री कृष्ण के रूप-सौंदर्य के साथ लोक-व्यवहार तथा नीति ज्ञान जैसे विषयों का वर्णन किया है। बिहारी के दोहे में प्रस्तुत इन पंक्तियों में कवि ने कम से कम शब्दों में अधिक से अधिक अर्थ भरने की कोशिश की है।

बिहारी के दोहे- Bihari Ke Dohe

सोहत ओढ़ैं पीतु पटु स्याम, सलौनैं गात।
मनौ नीलमनि सैल पर आतपु परयौ प्रभात॥

कहलाने एकत बसत अहि मयूर, मृग बाघ।
जगतु तपोवन सौ कियौ दीरघ दाघ निदाघ।।

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाइ।
सौंह करैं भौंहनु हँसै, दैन कहैं नटि जाइ॥

कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरे भौन मैं करत हैं नैननु हीं सब बात॥

बैठि रही अति सघन बन, पैठि सदन तन माँह।
देखि दुपहरी जेठ की छाँहौं चाहति छाँह॥

कागद पर लिखत न बनत, कहत सँदेसु लजात।
कहिहै सबु तेरौ हियौ, मेरे हिय की बात॥

प्रगट भए द्विजराज कुल, सुबस बसे ब्रज आइ।
मेरे हरौ कलेस सब, केसव केसवराइ॥

जपमाला, छापैं, तिलक सरै न एकौ कामु।
मन काँचै नाचै बृथा, साँचै राँचै रामु॥

बिहारी के दोहे का अर्थ सहित- Bihari Ke Dohe in Hindi Explanation

सोहत ओढ़ैं पीतु पटु स्याम, सलौनैं गात।
मनौ नीलमनि सैल पर आतपु परयौ प्रभात॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की उपर्युक्त पंक्तियों में कवि बिहारी जी ने श्री कृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन किया है। उन्होंने लिखा है कि श्री कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले रंग के वस्त्र ऐसे लग रहे हैं, मानो नीलमणि पर्वत पर सुबह-सुबह सूर्य की किरणें पड़ रही हों।

कहलाने एकत बसत अहि मयूर, मृग बाघ।
जगतु तपोवन सौ कियौ दीरघ दाघ निदाघ।।

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की प्रस्तुत पंक्तियों में बिहारी जी ने ग्रीष्म ऋतु की भयंकर गर्मी का वर्णन किया है। वे यहाँ कहते हैं कि जंगल में पड़ रही भयंकर गर्मी के कारण एक-दूसरे की जान के प्यासे जंगली जानवर जैसे बाघ, सांप, मोर, हिरन आदि आपसी शत्रुता भूलकर तपस्वियों की तरह शांति से एकसाथ रह रहे हैं।

बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाइ।
सौंह करैं भौंहनु हँसै, दैन कहैं नटि जाइ॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की उपर्युक्त पंक्तियों में गोपियाँ एक दूसरे से बातचीत करते हुए कह रहीं हैं कि हे सखी! हमने श्री कृष्ण से बात करने के लालच में उनकी मुरली छुपा ली है, ताकि उनका पूरा ध्यान हम पर रहे और हम उनसे प्रेम भरी बातें कर के सुख प्राप्त कर सकें। श्री कृष्ण तरह-तरह की कसमें देकर उनसे मुरली के बारे में पूछते हैं, लेकिन वे नहीं बताती। फिर जब श्री कृष्ण को यकीन हो जाता है कि गोपियों को मुरली के बारे में नहीं पता है, तब वे अपनी भौहें टेडी कर के हँसने लग जाती हैं। इस कारण, श्री कृष्ण को फिर से गोपियों पर संदेह हो जाता है।

कहत, नटत, रीझत, खिझत, मिलत, खिलत, लजियात।
भरे भौन मैं करत हैं नैननु हीं सब बात॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने दो प्रेमियों के बीच इशारे से हो रही बातचीत का वर्णन किया है। कवि कह रहे हैं कि तमाम लोगों की भीड़ बीच में भी दो प्रेमी एक-दूसरे से आँखों ही आँखों के इशारों से इस तरह बात करते हैं कि दूसरे लोगों को पता भी नहीं चलता। इशारे-इशारे में ही प्रेमी अपनी प्रेमिका से कुछ पूछता है और प्रेमिका उसका उत्तर ना में दे देती है। जिससे प्रेमी रूठ जाता है और उसे मनाने के लिए प्रेमिका आँखों ही आँखों में इशारे करती हैं। जब दोनों की आँखें मिलती हैं, तो दोनों ही शर्मा जाते हैं।

बैठि रही अति सघन बन, पैठि सदन तन माँह।
देखि दुपहरी जेठ की छाँहौं चाहति छाँह॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि बिहारी जी ने जून के महीने में पड़ने वाली गर्मी का वर्णन किया है। कवि इन पंक्तियों में गर्मी की प्रचंडता का वर्णन करते हुए कहते हैं कि गर्मी इतनी भयंकर है कि छाया भी इस गर्मी से बचने के लिए छांव खोज रही है। वह इस गर्मी से बचने के लिए या तो घने जंगलों में कहीं छुप गई है या फिर किसी घर के अंदर चली गई है।

कागद पर लिखत न बनत, कहत सँदेसु लजात।
कहिहै सबु तेरौ हियौ, मेरे हिय की बात॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने एक नायिका की विरह का वर्णन किया है, जो कि अपने प्रेमी से दूर है। वह अपने प्रियतम को अपनी स्थिति बता नहीं पा रही है। वह किसी कागज़ में प्रेम-पत्र लिख कर अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर पा रही है। उसे किसी को अपनी पीड़ा का संदेश भेजने में भी शर्म आ रही है। अंत में नायिका अपने प्रेमी से कहती है कि जिस तरह मेरा हृदय आपके लिए तरस रहा है, उसी तरह आपका हृदय भी मेरे लिए तड़प रहा होगा। इसलिए आप मेरे दिल की व्यथा अपने दिल से ही पूछ सकते हैं। वह आपको मेरे दिल के हाल के बारे में सब कुछ बता देगा।

प्रगट भए द्विजराज कुल, सुबस बसे ब्रज आइ।
मेरे हरौ कलेस सब, केसव केसवराइ॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि श्री कृष्ण से कहते हैं कि आप ने स्वयं ही चन्द्रवंश में जन्म लिया और ब्रज आकर बस गए। जहाँ उन्हें सब केशव कह कर बुलाते थे। बिहारी जी के पिता का नाम केशवराय था। इसीलिए कवि श्री कृष्ण को पिता समान मानते हुए, उनसे अपने सभी दुःख हरने की विनती करते हैं।

जपमाला, छापैं, तिलक सरै न एकौ कामु।
मन काँचै नाचै बृथा, साँचै राँचै रामु॥

बिहारी के दोहे भावार्थ : बिहारी के दोहे की प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने धार्मिक आडंबरों के स्थान पर सच्चे मन से ईश्वर की भक्ति करने पर ज़ोर दिया है। उनके अनुसार अगर आपका मन स्थिर नहीं है, तो हाथ में माला लेकर, माथे पर तिलक लगाकर एवं भगवान का नाम लिखे वस्त्र पहनकर बार-बार राम-राम चिल्लाने से कोई फायदा नहीं होगा। कवि के अनुसार मन तो कांच की तरह ही कोमल होता है, जो इधर-उधर की बातों में भटकता रहता है। अगर हम अपने मन को स्थिर करके ईश्वर की आराधना करें, तब ही हम सच्चे भक्त कहलाने के लायक हैं।

Mera Bai Ke Pad Class 10 Summary – मीरा के पद अर्थ सहित

Meera Bai Ke Pad Class 10 Summary

मीराबाई का जीवन परिचय- Meerabai Ka Jeevan Parichay: मीराबाई कृष्ण-भक्ति शाखा की प्रमुख कवयित्री हैं। इनकी जन्म-तिथि 1503 मानी जाती है। मीरा बाई के जन्म स्थान के बारे में कई मतभेद हैं। कई लोग जोधपुर में स्थित चोकड़ी (कुड़की) गांव को मीरा बाई का जन्म-स्थान मानते हैं। ये बचपन से ही कृष्णभक्ति में रुचि लेने लगी थीं। इनका विवाह उदयपुर के महाराणा कुंवर भोजराज के साथ हुआ। विवाह के कुछ समय बाद ही इनके पति का देहांत हो गया। इन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया, लेकिन मीरा इसके लिए तैयार नहीं हुईं।

वे संसार की ओर से विरक्त हो गयीं और साधु-संतों की संगति में हरिकीर्तन करते हुए अपना समय व्यतीत करने लगीं। संत रैदास की शिष्या मीरा के पद पूरे उत्तर भारत सहित गुजरात, बिहार और बंगाल तक प्रचलित हैं। मीरा बाई की कविताएं हिंदी तथा गुजराती दोनों ही भाषाओं में मिलती हैं।

मीरा के पद का भावार्थ- Meera Ke Pad in Hindi: कहते हैं कि मीराबाई का कृष्णभक्ति में नाचना और गाना, राज परिवार को अच्छा नहीं लगता था। उन्होंने कई बार मीराबाई को विष देकर मारने की कोशिश की। घर वालों के इस प्रकार के व्यवहार से परेशान होकर वह वृंदावन चली गईं। मीरा बाई की रचनाओं में एक ओर जहाँ श्री कृष्ण के निर्गुण रूप का वर्णन मिलता है, वहीं दूसरी ओर इन्होनें कृष्ण के सगुण रूप का भी गुणगान किया है।

यहाँ प्रस्तुत दोनों पदों के माध्यम से मीरा अपने आराध्य को उनका कर्तव्य याद दिलाने की कोशिश करती हैं। मीरा उन्हें अपने दुःख हरने के लिए कहती है। इसी दौरान मीरा श्री कृष्ण के प्रति अपने प्रेम का प्रदर्शन भी करती हैं।

मीरा के पद- Meera Ke Pad

हरि आप हरो जन री भीर।

द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धरयो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुञ्जर पीर।

दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥

स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिंदरावन री कुंज गली में, गोविंद लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजंती माला।
बिंदरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।

ऊँचा, ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साई।
आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रा तीरां।
मीरां रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ।

मीरा के पद अर्थ सहित – Mera Bai Ke Pad Class 10 Summary

हरि आप हरो जन री भीर।

मीरा के पद भावार्थ : प्रस्तुत पंक्तियों में कवयित्री मीरा बाई ने श्री हरि यानि विष्णु भगवान से अपनी पीड़ा हरने की विनती की है। इसी वजह से वे हरि के उन रूपों का स्मरण कर रही हैं, जिन्हें धारण कर के उन्होंने अपने भक्तों की रक्षा की थी। यहाँ मीरा कह रही हैं कि प्रभु अपने भक्तों की पीड़ा हरने यानि दूर करने ज़रूर आते हैं।

द्रोपदी री लाज राखी, आप बढ़ायो चीर।
भगत कारण रूप नरहरि, धरयो आप सरीर।
बूढ़तो गजराज राख्यो, काटी कुञ्जर पीर।

मीरा के पद भावार्थ : इन पंक्तियों में मीरा बाई ने हरि के विभिन्न रूपों का वर्णन किया है। प्रथम पंक्ति में मीरा ने हरि के कृष्ण रूप का वर्णन किया है, जब उन्होंने द्रौपदी को वस्त्र देकर भरी सभा में ठीक उसी प्रकार उनकी लाज बचाई, जिस प्रकार एक भाई अपनी बहन की रक्षा करता है। दूसरी पंक्ति में मीरा ने हरि के उस रूप का वर्णन किया है, जब प्रह्लाद की रक्षा करने के लिए हरि ने नरसिहं का अवतार लिया और हिरण्यकश्यप का वध किया। तीसरी पंक्ति में मीरा ने हरि के उस रूप का वर्णन किया है, जब हरि ने डूबते हुए बूढ़े गजराज की रक्षा हेतु मगरमच्छ का वध किया।

दासी मीराँ लाल गिरधर, हरो म्हारी भीर॥

मीरा के पद भावार्थ : मीरा बाई का मानना है कि जो भक्त सच्चे हृदय से हरि की भक्ति करता है, प्रभु उसके दुःख दूर करने ज़रूर आते हैं। इसीलिए मीरा प्रभु से खुद की पीड़ा दूर करने की विनती कर रही हैं।

स्याम म्हाने चाकर राखो जी,
गिरधारी लाला म्हाँने चाकर राखोजी।
चाकर रहस्यूँ बाग लगास्यूँ नित उठ दरसण पास्यूँ।
बिंदरावन री कुंज गली में, गोविंद लीला गास्यूँ।
चाकरी में दरसण पास्यूँ, सुमरण पास्यूँ खरची।
भाव भगती जागीरी पास्यूँ, तीनूं बाताँ सरसी।

मीरा के पद भावार्थ : प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा बाई की कृष्ण-भक्ति का उदाहरण मिलता है। वे कृष्ण की भक्ति में इस प्रकार लीन हैं कि उनके दर्शन पाने के लिए वे नौकर बनने के लिए भी तैयार हैं। इसी वजह से वे इन पंक्तियों में श्री कृष्ण से खुद को अपना नौकर रखने की विनती कर रही हैं।

जब वे नौकर बनकर सुबह-सुबह बागबानी करेंगी, तो इसी बहाने उन्हें कृष्ण के दर्शन हो जाएँगे। वृंदावन की तंग गलियों में वे गोविंद की लीला गाते हुए फिरेंगी। इस नौकरी में उन्हें वो सबकुछ मिलेगा, जिसकी उन्हें जन्मों से चाहत थी। उन्हें खर्च करने के लिए श्री कृष्ण के दर्शन एवं स्मरण मिलेंगे तथा उन्हें भाव एवं भक्ति की ऐसी जागीर मिलेगी, जो सदा उनके पास ही रह जाएगी।

मोर मुगट पीताम्बर सौहे, गल वैजंती माला।
बिंदरावन में धेनु चरावे, मोहन मुरली वाला।

मीरा के पद भावार्थ : प्रस्तुत पंक्तियों में मीरा बाई ने श्री कृष्ण के रूप-सौंदर्य का बड़ा ही मोहक वर्णन किया है। मीरा कहती हैं कि श्री कृष्ण जब हरे वस्त्र पहनकर, मोर-मुकुट धारण किये हुए, गले में वैजन्ती माला पहने और हाथों में बाँसुरी लेकर वृन्दावन में गाय चराते हैं, तो उनका रूप सभी का मन मोह लेता है।

ऊँचा, ऊँचा महल बणावं बिच बिच राखूँ बारी।
साँवरिया रा दरसण पास्यूँ, पहर कुसुम्बी साई।
आधी रात प्रभु दरसण, दीज्यो जमनाजी रा तीरां।
मीरां रा प्रभु गिरधर नागर, हिवड़ो घणो अधीराँ।

मीरा के पद भावार्थ : इन पंक्तियों में मीरा बाई ने श्री हरि के दर्शन करने की अपनी तीव्र इच्छा का वर्णन किया है। वे ऊँचे-ऊँचे महलों के बीच बाग़ लगाएंगी। जिनके बीच वे साज-श्रृंगार करके कुसुम्बी रंग की साड़ी पहनकर श्री कृष्ण के दर्शन करेंगी। वे तो श्री कृष्ण के दर्शन के लिए इतनी व्याकुल हो गई हैं कि उन्हें लग रहा है, आधी रात में ही श्री कृष्ण उन्हें यमुना के तट पर दर्शन देकर उनका दुःख हर लें।

शब्दार्थ :

  • मने – मुझको।
  • लगासूं – लगाऊंगी।
  • गासूं – गुण गाऊंगी।
  • खरची – रोज के लि खर्चा।
  • सरसी – अच्छी से अच्छी।
  • पास्यूँ — पाना
  • लीला — विविध रूप
  • सुमरण — याद करना / स्मरण
  • धेनु – गाय
  • जागीरी — जागीर / साम्राज्य
  • जमानाजी – यमुना
  • पीतांबर — पीला वस्त्र
  • वैजंती — एक फूल
  • तीरां — किनारा
  • अधीराँ (अधीर) — व्याकुल होना
  • बढ़ायो — बढ़ाना
  • गजराज — ऐरावत
  • चीर – कपड़ा
  • भगत – भक्त
  • पीर – कष्ट
  • गिरधर – कृष्ण
  • कुंजर — हाथी

Kabir Ki Sakhi Class 10 Summary in Hindi – कबीर की साखी अर्थ सहित

Kabir Ki Sakhi Class 10 Summary in Hindi

कबीर दास का जीवन परिचय – Kabir Das Ka Jivan Parichay: संत कबीर दास प्राचीन भारत के सबसे प्रसिद्ध कवियों की सूची में सबसे प्रथम स्थान पर आते हैं। उनका जन्म (kabir das ka janm) वाराणसी में हुआ। हालाँकि इस बात की पुष्टि नही की जा सकी, परन्तु ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म सन् 1400 के आसपास हुआ। उनके माता-पिता के बारे में भी यह प्रमाणित नहीं है कि उन्होनें कबीरदास को जन्म दिया या केवल उनका पालन-पोषण किया। कबीर ने खुद को अपनी कई रचनाओं में जुलाहा कहा है।

उन्होने कभी विधिवत शिक्षा नहीं प्राप्त की, किंतु ज्ञानी और संतों के साथ रहकर कबीर ने दीक्षा और ज्ञान प्राप्त किया। वह धार्मिक कर्मकांडों से परे थे। उनका मानना था कि परमात्मा एक है, इसलिए वह हर धर्म की आलोचना और प्रशंसा करते थे। उन्होने कई कविताएं गाईं, जो आज के सामाजिक परिदृश्य में भी उतनी ही सटीक हैं, जितनी कि उस समय।

उन्होने अपने अतिंम क्षण मगहर में व्यतीत किए और वहीं अपने प्राण त्यागे। कबीर दास की रचनाएँ (Kabir Das Ki Rachnaye) कबीर ग्रंथावली में संग्रहीत है। कबीर की कई रचनाएं गुरुग्रंथ साहिब में भी पढ़ी जा सकती हैं।

kabir ki sakhi class 10 – कबीर की साखी

ऐसी बाँणी बोलिए मन का आपा खोई।
अपना तन सीतल करै औरन कैं सुख होई।।

कस्तूरी कुण्डली बसै मृग ढ़ूँढ़ै बन माहि।
ऐसे घटी घटी राम हैं दुनिया देखै नाँहि॥

जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाँहि।
सब अँधियारा मिटी गया दीपक देख्या माँहि॥

सुखिया सब संसार है खाए अरु सोवै।
दुखिया दास कबीर है जागे अरु रोवै।।

बिरह भुवंगम तन बसै मन्त्र न लागै कोई।
राम बियोगी ना जिवै जिवै तो बौरा होई।।

निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।
बिन साबण पाँणीं बिना, निरमल करै सुभाइ॥

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
एकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ॥

हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि।
अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि॥

कबीर की साखी अर्थ सहित- Kabir Ke Dohe Sakhi Meaning in Hindi

ऐसी बाँणी बोलिए मन का आपा खोई।
अपना तन सीतल करै औरन कैं सुख होई।।

कबीर की साखी भावार्थ : प्रस्तुत पाठ कबीर की साखी की इन पंक्तियों में कबीर ने वाणी को अत्यधिक महत्त्वपूर्ण बताया है। महाकवि संत कबीर जी ने अपने दोहे में कहा है कि हमें ऐसी मधुर वाणी बोलनी चाहिए, जिससे हमें शीतलता का अनुभव हो और साथ ही सुनने वालों का मन भी प्रसन्न हो उठे। मधुर वाणी से समाज में प्रेम की भावना का संचार होता है। जबकि कटु वचनों से हम एक-दूसरे के विरोधी बन जाते हैं। इसलिए हमेशा मीठा और उचित ही बोलना चाहिए, जो दूसरों को तो प्रसन्न करता ही है और आपको भी सुख की अनुभूति कराता है।

कस्तूरी कुण्डली बसै मृग ढ़ूँढ़ै बन माहि।
ऐसे घटी घटी राम हैं दुनिया देखै नाँहि॥

कबीर की साखी भावार्थ : जिस प्रकार हिरण की नाभि में कस्तूरी रहती है, परन्तु हिरण इस बात से अनजान उसकी खुशबू के कारण उसे पूरे जंगल में इधर-उधर ढूंढ़ता रहता है। ठीक इसी प्रकार ईश्वर को प्राप्त करने के लिए हम उन्हें मंदिर-मस्जिद, पूजा-पाठ में ढूंढ़ते हैं। जबकि ईश्वर तो स्वयं कण-कण में बसे हुए हैं, उन्हें कहीं ढूंढ़ने की ज़रूरत नहीं। बस ज़रूरत है, तो खुद को पहचानने की।

कस्तूरी :- कस्तूरी एक तरह का पदार्थ होता है, जो नर-हिरण की नाभि में पाया जाता है। इसमें एक प्रकार की विशेष खुशबू होती है। इसे इंग्लिश में Deer musk बोलते हैं। इसका इस्तेमाल परफ्यूम तथा मेडिसिन (दवाइयाँ) बनाने में होता है। यह बहुत ही महंगा होता है।

जब मैं था तब हरि नहीं अब हरि हैं मैं नाँहि।
सब अँधियारा मिटी गया दीपक देख्या माँहि॥

कबीर की साखी भावार्थ : प्रस्तुत पाठ कबीर की साखी की इन पंक्तियों में कबीर जी कह रहे हैं कि जब तक मनुष्य में अहंकार (मैं) रहता है, तब तक वह ईश्वर की भक्ति में लीन नहीं हो सकता और एक बार जो मनुष्य ईश्वर-भक्ति में पूर्ण रुप से लीन हो जाता है, उस मनुष्य के अंदर कोई अहंकार शेष नहीं रहता। वह खुद को नगण्य समझता है। जिस प्रकार दीपक के जलते ही पूरा अंधकार मिट जाता है और चारों तरफ प्रकाश फ़ैल जाता है, ठीक उसी प्रकार, भक्ति के मार्ग पर चलने से ही मनुष्य के अंदर व्याप्त अहंकार मिट जाता है।

सुखिया सब संसार है खाए अरु सोवै।
दुखिया दास कबीर है जागे अरु रोवै।।

कबीर की साखी भावार्थ :  प्रस्तुत पाठ कबीर की साखी की इन पंक्तियों में कबीर ने समाज के ऊपर व्यंग्य किया है। वह कहते हैं कि सारा संसार किसी झांसे में जी रहा है। लोग खाते हैं और सोते हैं, उन्हें किसी बात की चिंता नहीं है। वह सिर्फ़ खाने एवं सोने से ही ख़ुश हो जाते हैं। जबकि सच्ची ख़ुशी तो तब प्राप्त होती है, जब आप प्रभु की आराधना में लीन हो जाते हो। परन्तु भक्ति का मार्ग इतना आसान नहीं है, इसी वजह से संत कबीर को जागना एवं रोना पड़ता है।

बिरह भुवंगम तन बसै मन्त्र न लागै कोई।
राम बियोगी ना जिवै जिवै तो बौरा होई।।

कबीर की साखी भावार्थ : जिस प्रकार अपने प्रेमी से बिछड़े हुए व्यक्ति की पीड़ा किसी मंत्र या दवा से ठीक नहीं हो सकती, ठीक उसी प्रकार, अपने प्रभु से बिछडा हुआ कोई भक्त जी नहीं सकता। उसमें प्रभु-भक्ति के अलावा कुछ शेष बचता ही नहीं। अपने प्रभु से बिछड़ अगर वो जीवित रह भी जाते हैं, तो अपने प्रभु की याद में वो पागल हो जाते हैं।

निंदक नेड़ा राखिये, आँगणि कुटी बँधाइ।
बिन साबण पाँणीं बिना, निरमल करै सुभाइ॥

कबीर की साखी भावार्थ : प्रस्तुत पाठ कबीर की साखी की इन पंक्तियों में संत कबीर दास जी के अनुसार जो व्यक्ति हमारी निंदा करते हैं, उनसे कभी दूर नहीं भागना चाहिए, बल्कि हमें हमेशा उनके समीप रहना चाहिए। जैसे हम किसी गाय को अपने आँगन में खूँटे से बांधकर रखते हैं, ठीक उसी प्रकार ही हमें निंदा करने वाले व्यक्ति को अपने पास रखने का कोई प्रबंध कर लेना चाहिए। जिससे हम रोज उनसे अपनी बुराईयों के बारे में जान सकें और अपनी गलतियाँ दोबारा दोहराने से बच सकें। इस प्रकार हम बिना साबुन और पानी के ही खुद को निर्मल बना सकते हैं।

पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
एकै अषिर पीव का, पढ़ै सु पंडित होइ॥

कबीर की साखी भावार्थ : प्रस्तुत पाठ कबीर की साखी की इन पंक्तियों में कबीर के अनुसार सिर्फ़ मोटी-मोटी किताबों को पढ़कर किताबी ज्ञान प्राप्त कर लेने से भी कोई पंडित नहीं बन सकता। जबकि ईश्वर-भक्ति का एक अक्षर पढ़ कर भी लोग पंडित बन जाते हैं। अर्थात किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक ज्ञान भी होना आवश्यक है, नहीं तो कोई व्यक्ति ज्ञानी नहीं बन सकता।

हम घर जाल्या आपणाँ, लिया मुराड़ा हाथि।
अब घर जालौं तास का, जे चलै हमारे साथि॥

कबीर की साखी भावार्थ : सच्चा ज्ञान प्राप्त करने के लिए, हमें अपनी मोह-माया का त्याग करना होगा। तभी हम सच्चे ज्ञान की प्राप्ति कर सकते हैं। कबीर के अनुसार, उन्होंने खुद ही अपने मोह-माया रूपी घर को ज्ञान रूपी मशाल से जलाया है। अगर कोई उनके साथ भक्ति की राह पर चलना चाहता है, तो कबीर अपनी इस मशाल से उसका घर भी रौशन करेंगे अर्थात अपने ज्ञान से उसे मोह-माया के बंधन से मुक्त करेंगे।

शब्दार्थ :
  • बाँणी – बात करना (वाणी)
  • आपा (मैं) – अहंकार (ईगो)
  • तन – शरीर (बॉडी)
  • सीतल – ठंडा
  • कस्तूरी – कस्तूरी एक तरह का पदार्थ है जो नर हिरन के नाभि में पाया जाता है।
  • कुंडली – नाभि
  • माँहि – भीतर, अंदर

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 8 Challenges to Democracy (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 8 Challenges to Democracy (Hindi Medium)

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Loktantra Ki Chunotiya Class 10th Question Answer in Hindi

लोकतंत्र की चुनौतियां Class 10 प्रश्न अभ्यास
पाठ्यपुस्तक से

संक्षेप में लिखें

लोकतंत्र की चुनौतियां क्लास १० 1. राजनीतिक सुधार से क्या तात्पर्य है?

(क) राजनीतिक दलों में सुधार को राजनीतिक सुधार कहा जाता है
(ख) लोकतंत्र की विभिन्न चुनौतियों के बारे में सभी सुझाव या प्रस्ताव लोकतांत्रिक सुधार या राजनीतिक सुधार कहे जाते हैं।
(ग) राजनीतिक व्यवस्था में सुधार
(घ) राजनीतिक गतिविधियों में सुधार।

2. लोकतंत्र की परिभाषा या अर्थ बताएँ।

(क) लोकतंत्र शासन का वह स्वरूप है जिसमें लोग अपने शासकों का चुनाव करते हैं।
(ख) लोकतंत्र संसदीय शासन प्रणाली का दूसरा रूप है।
(ग) लोकतंत्र विभिन्न प्रकार चुनौतियों का सामना करता है।
(घ) अफसरशाही के माध्यम से चलाया जाने वाला शासन लोकतंत्र कहलाता है।

3. एक अच्छे लोकतंत्र को किस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है?

(क) एक अच्छे लोकतंत्र में शासक को जनता चुने और जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप शासक काम करे ।
(ख) अच्छे प्रशासक और अच्छे प्रशासनिक तंत्र अच्छे लोकतंत्र के गुण हैं।
(ग) शासन में जनता की भागीदारी ही अच्छे लोकतंत्र के गुण हैं।
(घ) जनता को अधिक से अधिक अधिकार मिलना ही अच्छे लोकतंत्र की विशेषता है।

4. लोकतांत्रिक सुधारों को किस प्रकार लागू किया जा सकता है?

(क) लोकतांत्रिक सुधारों को कानून और विभिन्न नीतियों या फार्मूलों से लागू किया जा सकता है।
(ख) लोकतांत्रिक सुधारों को प्रशासनिक तंत्र द्वारा लागू किया जा सकता है।
(ग) लोकतांत्रिक सुधारों को योजना आयोग के माध्यम से लागू किया जा सकता है।
(घ) लोकतांत्रिक सुधारों को प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा लागू किया जा सकता है।

5. दुनिया के कितने भागों में लोकतांत्रिक शासन नहीं है?

(क) लगभग आधे भागों में
(ख) लगभग एक तिहाई भागों में
(ग) लगभग एक चौथाई भागों में
(घ) लगभग दो तिहाई भागों में।

6. चुनौती किसे कहते हैं?

(क) विभिन्न प्रकार के संघर्ष
(ख) विभिन्न तरह की मुश्किलें
(ग) लोकतांत्रिक अव्यवस्था
(घ) उपरोक्त सभी

7. विस्तार की चुनौती से आप क्या समझते हैं?

(क) लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धान्तों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना ।
(ख) स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार सम्पन्न बनाना।
(ग) महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना
(घ) उपरोक्त सभी।

8. लोकतंत्र की एक चुनौती का उल्लेख करें।

(क) भ्रष्ट प्रशासनिक व्यवस्था की चुनौती
(ख) बुनियादी आधार बनाने की चुनौती जैसे सेना का नियंत्रण समाप्त करना
(ग) समस्याओं से छुटकारा पाना
(घ) आर्थिक असमानता को दूर करने की चुनौती।

9. लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती का एक उदाहरण है

(क) महिलाओं और अल्पसंख्यकों की भागीदारी सुनिश्चित करना
(ख) स्थानीय निकाय शासन को अधिक शक्ति प्रदान करना
(ग) पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करना
(घ) दलितों और अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी सुनिश्चित करना।

10. लोकतंत्र को मजबूत करने की चुनौती का एक उदाहरण दें।

(क) संस्थाओं की कार्यपद्धति को सुधारना
(ख) राजनीतिक दल में सुधार लाना
(ग) सत्ता का विकेंद्रीकरण करना
(घ) उपरोक्त सभी।

11. इसमें मौजूदा गैर-लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को गिराने, सत्ता पर सेना के नियंत्रण को समाप्त करने और एक संप्रभु तथा कारगर शासन व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती है

(क) विस्तार की चुनौती
(ख) लोकतंत्र को मजबूत बनाने की चुनौती
(ग) बुनियादी आधार बनाने की चुनौती
(घ) उपरोक्त सभी।

12. निम्नलिखित में से कौन सी चुनौती हर लोकतंत्र के सामने किसी रूप में हैं?

(क) विस्तार की चुनौती ।
(ख) लोकतंत्र को मजबूत बनाने की चुनौती
(ग) बुनियादी आधार बनाने की चुनौती
(घ) उपरोक्त में से कोई नहीं।

उत्तर

  1. (ख)
  2. (क)
  3. (क)
  4. (क)
  5. (ग)
  6. (ख)
  7. (घ)
  8. (ख)
  9. (क)
  10. (क)
  11. (ग)
  12. (ख)

II. अति लघु उत्तरीय प्रश्न (Very Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. धर्मनिरपेक्षता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर राज्य का अपना कोई धर्म न हो तथा राज्य में रहने वाले व्यक्ति स्वेच्छा से कोई भी धर्म अपना सके तथा राज्य धर्म के आधार पर नागरिकों में भेदभाव न करे तो यह स्थिति धर्म निरपेक्षता कहलाती है।

प्रश्न 2. लोकतांत्रिक व्यवस्था क्या है?
उत्तर यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसके केंद्र में लोग हों अर्थात् लोगों के द्वारा बनाई सरकार, जो लोगों के हितों के लिए काम करेगी तथा लोगों की इच्छा तक ही बनी रहेगी।

प्रश्न 3. निरक्षरता का क्या अर्थ है?
उत्तर वह स्थिति जिसमें लोगों को अक्षरों का ज्ञान न हो अर्थात् वे पढ़े लिखे न हो निरक्षरता कहलाती है।

प्रश्न 4. राजनीतिक सुधार से क्या तात्पर्य है?
उत्तर लोकतंत्र की विभिन्न चुनौतियों के बारे में सभी सुझाव या प्रस्ताव राजनीतिक सुधार कहे जाते हैं।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक सुधारों को किस प्रकार लागू किया जा सकता है?
उत्तर लोकतांत्रिक सुधारों को कानूनों और विभिन्न नीतियों या फार्मूलों से लागू किया जा सकता है।

प्रश्न 6. एक अच्छे लोकतंत्र को किस प्रकार परिभाषित किया जा सकता है?
उत्तर जनता शासक को चुने और शासक जनता की भावनाओं और आकांक्षाओं के अनुरूप काम करें।

प्रश्न 7. विस्तार की चुनौती से आप क्या समझते हैं?
उत्तर विस्तार की चुनौती से तात्पर्य लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना है।

प्रश्न 8. नए और सावधानी से बनाए गए कानूनों के क्या लाभ होते हैं?
उत्तर नए कानून सारी अवांछित चीजें खत्म कर देंगे यह सोच लेना भले ही सुखद हो लेकिन इस लालच पर लगाम लगाना ही बेहतर है। निश्चित रूप से सुधारों के मामले में कानून की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सावधानी से बनाए गए कानून गलत राजनीतिक आचरणों को हतोत्साहित और अच्छे कामकाज को प्रोत्साहित करेंगे।

प्रश्न 9. सबसे बढ़िया कानून किसे माना जा सकता है?
उत्तर सबसे बढ़िया कानून वे हैं जो लोगों को लोकतांत्रिक सुधार करने की ताकत देते हैं। सूचना का अधिकार कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने का अच्छा उदाहरण है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा कठोर दंड का प्रावधान करने वाले मौजूदा कानूनों की मदद करता है।

प्रश्न 10. उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सर्वेक्षण के उपरांत क्या पाया?
उत्तर उत्तर प्रदेश सरकार ने एक सर्वेक्षण कराया और पाया कि ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पदस्य अधिकतर डॉक्टर अनुपस्थित थे। वे शहरों में रहते हैं, निजी प्रैक्टिस करते हैं और महीने में सिर्फ एक था दो बार अपनी नियुक्ति वाली जगह पर घूम आते हैं। गाँव वालों को साधारण रोगों के इलाज के लिए भी शहर जाना होता है।

प्रश्न 11. सांप्रदायिकता से क्या तात्पर्य है?
उत्तर जब किसी एक धर्म के लोग अपने आपको दूसरे धर्मों से ऊपर समझते हैं तथा अपने धर्म के लिए दूसरे धर्मों को नीचा दिखाते हैं तो यह प्रवृति सांप्रदायिकता कहलाती है।

प्रश्न 12. चुनौतियाँ का अर्थ बताएँ।
उत्तर लोकतंत्र के मार्ग में आने वाली ने बाधाएँ जिन्हें दूर किए बिना लोकतंत्र का विकास संभव नहीं होता।

प्रश्न 13. दुनिया के कितने भागों में लोकतांत्रिक शासन नहीं है?
उत्तर दुनिया के लगभग एक चौथाई भागों में लोकतांत्रिक शासन नहीं है।

III. लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Type Questions)

प्रश्न 1. विस्तार की चुनौती पर सफलता पाने के लिए किन्हीं तीन उपायों की व्याख्या कीजिए। [AI CBSE 2013 (C)]
उत्तर देखें लघु उत्तरीय प्रश्न संख्या 7।

प्रश्न 2. विधिक-संवैधानिक बदलावों को लाने मात्र से ही लोकतंत्र की चुनौतियों का हल नहीं किया जा सकता।” उदाहरण सहित इस कथन की न्याय संगत पुष्टि कीजिए। (AI CBSE 2013)
उत्तर कानून बनाकर राजनीति को सुधारने की बात सोचना बहुत लुभावना लग सकता है। नए कानून सारी अवांछित चीजें खत्म कर देंगे यह सोच लेना भले ही सुखद हो लेकिन इस लालच पर लगाम लगाना ही बेहतर है। निश्चित रूप से सुधारों के मामले में कानून की एक महत्त्वपूर्ण भूमिका है। सावधानी से बनाए गए कानून गलत राजनीतिक आचरणों को हतोत्साहित और अच्छे कामकाज को प्रोत्साहित करेंगे। पर विधिक संवैधानिक बदलावों को ला देने भर से लोकतंत्र की चुनौतियों को हल नहीं किया जा सकता। उदाहरण स्वरूप-क्रिकेट एल.वी.डब्लू. के नियम में बदलाव से बल्लेबाजों द्वारा अपनाए जाने वाले बल्लेबाजी के नकारात्मक दाँव पेंच को कम किया जा सकता है पर यह कोई भी नहीं सोच सकता कि सिर्फ नियमों में बदलाव कर देने भर से क्रिकेट खेल सुधर जाएगा उचित नहीं है।

प्रश्न 3. संसार के कुछ देश ‘लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती’ का किस प्रकार सामना कर रहे हैं? (AI CBSE 2012)
उत्तर संसार के कुछ देश लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती का सामना कर रहे हैं। कई देशों में एकात्मक शासन व्यवस्था कायम है ऐसी स्थिति में शासन का केंद्र एक स्थान पर होता है। जबकि लोकतंत्र का विस्तार तभी हो सकता है जब स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार संपन्न बनाना, संघ की सभी इकाइयों के लिए संघ के सिद्धांतों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना, महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना आदि ऐसी ही चुनौतियाँ

प्रश्न 4. विश्व में कुछ देश किस प्रकार लोकतंत्र की बुनियादी आधार बनाने की चुनौती का सामना कर रहे हैं? उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए। (CBSE 2012)
उत्तर दुनिया के एक चौथाई हिस्से में अभी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था नहीं है। इन इलाकों में लोकतंत्र के लिए बहुत ही मुश्किल चुनौतियाँ हैं। इन देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरफ जाने और लोकतांत्रिक सरकार गठित करने के लिए जरूरी बुनियादी आधार बनाने की चुनौती है। इसमें मौजूदा गैर लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को गिराने, सत्ता पर सेना के नियंत्रण को समाप्त करने और एक संप्रभु तथा कारगर शासन व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती है।

प्रश्न 5. लोकतंत्र की पुर्नपरिभाषा में किन-किन तत्वों को जोड़ा गया?
उत्तर पहले लोकतंत्र की परिभाषा दी गई थी-लोकतंत्र शासन का वह स्वरूप है जिसमें लोग अपने शासकों का चुनाव खुद करते हैं। इसके बाद कुछ और चीजें इसमें जोड़ी गईं

  1. लोगों द्वारा चुने गए शासक ही सारे फैसले लें।
  2. चुनाव में लोगों को वर्तमान शासकों को बदलने और अपनी पसंद जाहिर करने का पर्याप्त अवसर और विकल्प मिलना चाहिए। ये विकल्प और अवसर हर किसी को बराबरी से उपलब्ध होने चाहिए।
  3. विकल्प चुनने के इस तरीके से ऐसी सरकार का गठन होना चाहिए जो संविधान के बुनियादी नियमों और नागरिकों के अधिकारों को मानते हुए काम करे।

प्रश्न 6. किस प्रकार के कानून राजनीति में सफल होते हैं?
उत्तर राजनीतिक कार्यकर्ता को अच्छे काम करने के लिए बढ़ावा देनेवाले या लाभ पहुँचानेवाले कानूनों के सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। सबसे बढ़िया कानून वे हैं जो लोगों को लोकतांत्रिक सुधार करने की ताकत देते हैं। सूचना का अधिकार-कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने को अच्छा उदाहरण है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा कठोर दंड लागू करने वाले मौजूदा कानूनों की मदद करता है।

प्रश्न 7. भारत में लोकतंत्र के विस्तार की चुनौती का वर्णन करें। [AI CBSE 2013 (C)]
उत्तर अधिकांश लोकतंत्रीय व्यवस्थाओं के सामने अपने विस्तार की चुनौती है। इसमें लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना शामिल है। भारत में भी लोकतंत्र के विस्तार की जरूरत है। इसके लिए स्थानीय संस्थाओं को अधिक अधिकार संपन्न बनाना होगा। संघात्मक शासन के सिद्धांतों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना होगा, राज्यों की स्वायत्तता को बढ़ाना होगा, केंद्र का राज्यों पर नियंत्रण कम करना होगा। महिलाओं, अल्पसंख्यकों तथा अन्य समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। लोगों को जागरूक बनाना होगा, तभी लोकतंत्र का विस्तार हो सकेगा।

प्रश्न 8. लोकतंत्र के लिए जरूरी पहलूओं का वर्णन कीजिए। HOTS
उत्तर लोकतंत्र के लिए कुछ जरूरी पहलू निम्नलिखित हैं

  1. लोकतांत्रिक अधिकार लोकतंत्र का प्रमुख पहलू है। यह अधिकार सिर्फ वोट देने, चुनाव लड़ने और राजनीतिक संगठन बनाने भर के लिए नहीं है। इसमें सामाजिक और आर्थिक अधिकारों को शामिल करते हैं, जिन्हें लोकतांत्रिक शासन को अपने नागरिकों को देना ही चाहिए।
  2. सत्ता में हिस्सेदारी को लोकतंत्र की भावना के अनुकूल माना गया है। इस प्रकार सरकारों और सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
  3. लोकतंत्र बहुमत की तानाशाही या क्रूर शासन व्यवस्था नहीं हो सकता और अल्पसंख्यक आवाजों का आदर करना लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है।
  4. समाज में विद्यमान हर प्रकार के भेदभाव को मिटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्त्वपूर्ण काम है।
  5. लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमें कुछ न्यूनतम नतीजों की उम्मीद तो करनी ही चाहिए।

IV. दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type Questions)

प्रश्न 1. लोकतंत्र के सम्मुख प्रमुख चुनौतियों का वर्णन करें। HOTS
उत्तर अलग-अलग देशों के सामने अलग-अलग तरह की चुनौतियाँ होती हैं। तीन प्रमुख चुनौतियाँ निम्नलिखित हैं

  1. दुनिया के जिन देशों में अभी भी लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था नहीं है इन इलाकों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की तरफ़ जाने और लोकतांत्रिक सरकार गठित करने के लिए जरूरी बुनियादी आधार बनाने की चुनौती है। इसमें मौजूदा गैरलोकतांत्रिक शासन व्यवस्था को गिराने, सत्ता पर सेना के नियंत्रण को समाप्त करने और एक संप्रभु तथा कारगर शासन व्यवस्था को स्थापित करने की चुनौती है।
  2. अधिकांश स्थापित लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने अपने विस्तार की चुनौती है। इसमें लोकतांत्रिक शासन के बुनियादी सिद्धांतों को सभी इलाकों, सभी सामाजिक समूहों और विभिन्न संस्थाओं में लागू करना,शामिल है। स्थानीय अधिकारों को अधिक अधिकार संपन्न बनाना, संघ की सभी इकाइयों के लिए संघ के सिद्धांतों को व्यावहारिक स्तर पर लागू करना, महिलाओं और अल्पसंख्यक समूहों की उचित भागीदारी सुनिश्चित करना आदि ऐसी ही चुनौतियाँ हैं। इसका यह भी मतलब है कि कम-से-कम चीजें ही लोकतांत्रिक नियंत्रण के बाहर रहनी चाहिए। भारत और | दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्रों में से एक अमेरिका जैसे देशों के सामने भी यह चुनौती है।
  3. तीसरी चुनौती लोकतंत्र को मजबूत करने की है। हर लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने किसी-न-किसी रूप में यह चुनौती रहती ही है। इसमें लोकतांत्रिक संस्थाओं और व्यवहारों को मजबूत बनाना शामिल है। यह काम इस तरह से होना चाहिए कि लोग लोकतंत्र से जुड़ी अपनी उम्मीदों को पूरा कर सकें। लेकिन अलग-अलग समाजों में आम आदमी की लोकतंत्र में अलग-अलग तरह की अपेक्षाएँ होती हैं। इसलिए यह चुनौती दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग अर्थ और अलग स्वरूप ले लेती है। संक्षेप में कहें तो इसका मतलबे संस्थाओं की कार्य-पद्धति को सुधारना और मज़बूत करना होता है, ताकि लोगों की भागीदारी और नियंत्रण में वृद्धि हो। इसके लिए फैसला लेने की प्रक्रिया पर अमीर और प्रभावशाली लोगों के नियंत्रण और प्रभाव को कम करने की जरूरत होती है।

प्रश्न 2. एक अच्छे लोकतंत्र की परिभाषा दीजिए। इसकी प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
उत्तर लोकतंत्र शासन को वह स्वरूप है जिसमें लोग अपने शासकों का स्वयं चुनाव करते हैं। ये शासक संविधान के बुनियादी नियमों और नागरिकों के अधिकारों को मानते हुए कानून बनाते हैं। चुनाव में लोगों को शासकों को बदलने और अपनी पसंद जाहिर करने का पर्याप्त अवसर और विकल्प मिलता है। ये अवसर सबको समान रूप से मिलते हैं।

लोकतांत्रिक शासन की मुख्य विशेषताएँ –

  1. लोकतांत्रिक शासन में अंतिम सत्ता जनता के हाथों में होती है। जनता अपने शासकों का चुनाव करती है और जब चाहे तब उन्हें उनके पद से हटा सकती है।
  2. लोकतांत्रिक शासन में सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी होती है, इसलिए वह संविधान के नियमों तथा जनता के हितों को ध्यान में रखकर कानून बनाती है।
  3. लोकतांत्रिक देशों में लोगों को वोट डालने, चुनाव लड़ने और राजनीतिक संगठन बनाने के अतिरिक्त विभिन्न सामाजिक और आर्थिक अधिकार भी प्राप्त होते हैं।
  4. लोकतांत्रिक शासन समाज में विद्यमान मतभेदों का शांतिपूर्ण तरीके से निपटारा कर सकता है। लोकतंत्र विभिन्न सामाजिक टकरावों को कम करने की कोशिश करता है।
  5. लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार की गलत नीतियों की आलोचना करने का पूरा अधिकार होता है।
  6. लोकतंत्र देश के बहुसंख्यक समुदाय के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय के हितों की भी रक्षा करता है।
  7. एक अच्छा लोकतांत्रिक शासन वह होगा जिसमें अधिक-से-अधिक जनता अधिक-से-अधिक भागीदारी दिखाए। सरकारी मसलों पर जनता अपनी राय दे, यदि जनता राजनीतिक रूप से शिक्षित होगी तो वह लोकतंत्र में भागीदारी कर सकेगी, जो एक अच्छे लोकतंत्र की प्रमुख विशेषता है।
  8. अच्छे लोकतंत्र के लिए स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कराए जाने चाहिए। जिससे सही प्रतिनिधि चुनकर सरकार में आ सकें।
  9. लोकतांत्रिक देश में जनता को राजनीतिक समानता प्राप्त होती है। कोई भी व्यक्ति सरकार में जा सकता है और राजनीतिक दल का निर्माण कर सकता है।
  10. एक लोकतांत्रिक देश में सरकार विभिन्न प्रकार की असमानताओं को कम करने की कोशिश करती है।

इस प्रकार एक अच्छे लोकतंत्र की कई विशेषताएँ हैं। जहाँ ये सभी विशेषताएँ होती हैं वहाँ लोकतंत्र को सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

प्रश्न 3. विभिन्न राजनीतिक सुधारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर लोकतंत्र की विभिन्न चुनौतियों के बारे में सभी सुझाव या प्रस्ताव लोकतांत्रिक सुधार या राजनीतिक सुधार कहे जाते हैं। किसी भी लोकतांत्रिक देश में निम्नलिखित राजनीतिक सुधार किए जा सकते हैं

  1. कानून बनाकर कुछ हद तक राजनीतिक सुधार किए जा सकते हैं। सावधानी से कानून बनाकर गलत राजनीतिक आचरणों को हतोत्साहित और अच्छे कामकाज को प्रोत्साहित करेंगे।
  2. कानूनी परिवर्तनों के कभी-कभी उल्टे परिणाम निकलते हैं। आमतौर पर किसी चीज की मनाही करने वाले कानून राजनीति में ज्यादा सफल नहीं होते। राजनीतिक कार्यकर्ता को अच्छे काम करने के लिए बढ़ावा देने वाले या लाभ पहुँचाने वाले कानूनों के सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। सबसे बढ़िया कानून वे हैं जो लोगों को लोकतांत्रिक सुधार करने की ताकत देते हैं। सूचना का अधिकार-कानून लोगों को जानकार बनाने और लोकतंत्र के रखवाले के तौर पर सक्रिय करने का अच्छा उदाहरण है। ऐसा कानून भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाता है और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने तथा कठोर दंड का प्रावधान करने वाले वाले मौजूदा कानूनों की मदद करता है।
  3. लोकतांत्रिक सुधार तो मुख्यत: राजनीतिक दल ही करते हैं। इसलिए राजनीतिक सुधारों का ज़ोर मुख्यत: लोकतांत्रिक कामकाज को ज्यादा मजबूत बनाने पर होना चाहिए। इससे आम नागरिक की राजनीतिक भागीदारी के स्तर और गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
  4. राजनीतिक सुधार के किसी भी प्रस्ताव में अच्छे समाधान की चिंता होने के साथ-साथ यह सोच भी होनी चाहिए कि इन्हें कौन और क्यों लागू करेगा? यह मान लेना समझदारी नहीं कि संसद कोई ऐसा कानून बना देगी जो हर राजनीतिक दल और सांसद के हितों के खिलाफ़ हो। पर लोकतांत्रिक आंदोलन, नागरिक संगठन और मीडिया पर भरोसा करने वाले उपायों के सफल होने की संभावना होती है।

प्रश्न 4. लोकतंत्र की नवीन परिभाषा में किन बातों को सम्मिलित किया गया है?
उत्तर

लोकतंत्र की नवीन परिभाषा में ये बातें सम्मिलित की गई हैं –

  1. जनता द्वारा चुने गए शासक ही सारे प्रमुख फैसले लें।
  2. चुनाव में लोगों को वर्तमान शासकों को बदलने और अपनी पसंद जाहिर करने का पर्याप्त अवसर और विकल्प मिलना चाहिए। ये विकल्प और अवसर हर किसी को बराबरी के आधार पर मिले।
  3. विकल्प चुनने के इस तरीके से ऐसी सरकार का गठन होना चाहिए जो संविधान के बुनियादी नियमों और नागरिकों के अधिकारों को मानते हुए काम करें।
  4. लोकतंत्र के उन आदर्शों को इसमें सम्मिलित किया जाना चाहिए ताकि लोकतांत्रिक और गैर-लोकतांत्रिक सरकारों में अंतर किया जा सके।
  5. लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोकतांत्रिक अधिकार के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक अधिकारों की चर्चा की जानी चाहिए।
  6. लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामाजिक समूहों के बीच सत्ता की साझेदारी हो।
  7. लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों की आवाज़ का भी आदर होना चाहिए।
  8. हर प्रकार के भेदभाव को नष्ट करना चाहिए।
  9. लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमें कुछ न कुछ परिणाम अवश्य प्राप्त करने के प्रयास करने चाहिए।

स्वयं करें

  1. भारतीय लोकतंत्र के समक्ष आने वाली चुनौतियों का वर्णन करें।
  2. लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक सुधार कैसे किए जा सकते हैं?
  3. कानून बनाकर राजनीतिक सुधार करना कहाँ तक सही है?
  4. लोकतंत्र की परिभाषा दें।
  5. एक अच्छे लोकतंत्र की विशेषता बताइए।
  6. चुनौतियों के उन तीन प्रमुख का उल्लेख करें जिनका सामना विश्व के अधिकांश लोकतंत्र कर रहे हैं।
  7. म्यांमार लोकतांत्रिक व्यवस्था की ओर जाने के लिए बुनियादी आधार बनाने की चुनौती का सामना किस प्रकार कर रहा है? व्याख्या करें।
  8. कुछ दिशा निर्देशों की चर्चा करें जिन्हें भारत में राजनीतिक सुधारों के लिए तरीका और जरिया हूँढते समय अपने ध्यान में रखा जा सकता है।
  9. लोकतांत्रिक सुधारों से क्या तात्पर्य है?

Hope given NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 8 are helpful to complete your homework.

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 7 Outcomes of Democracy (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 7 Outcomes of Democracy (Hindi Medium)

These Solutions are part of NCERT Solutions for Class 10 Social Science in Hindi Medium. Here we have given NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 7 Outcomes of Democracy.

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Civics Chapter 7 in Hindi

Class 10 Civics Chapter 7 Notes In Hindi प्रश्न अभ्यास
Class 10 Civics Chapter 7 In Hindi पाठ्यपुस्तक से

Outcomes of Democracy in Hindi प्रश्न 1. लोकतंत्र किस तरह उत्तरदायी, जिम्मेवार और वैध सरकार का गठन करता है?
उत्तर लोकतांत्रिक व्यवस्था उत्तरदायी, जिम्मेवार और वैध सरकार का गठन करती है। निम्नलिखित तत्वों से इसे समझा जा सकता है

  1. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव – सभी लोकतांत्रिक देशों में एक निश्चित अवधि के बाद चुनाव कराए जाते हैं। ये चुनाव निष्पक्ष होते हैं। सभी दल स्वतंत्र रूप से अपने उम्मीदवारों को खड़ा करते हैं और मतदाता अपनी इच्छानुसार किसी को भी चुन सकते हैं। ये प्रतिनिधि जनता के प्रति उत्तरदायी होते हैं और जनता की इच्छा पर्यंत अपने पद पर बने रहते हैं।
  2. कानूनों पर खुली चर्चा – लोकतांत्रिक देशों में सरकार जो भी कानून बनाती है वह एक लंबी प्रक्रिया के बाद बनता है। उस पर पूरी बहस तथा विचार-विर्मश किया जाता है फिर उसे जनता के समक्ष रखा जाता है। इसलिए इस बात की संभावना होती है कि लोग उसके फैसलों को मानेंगे और वे ज्यादा प्रभावी होंगे।
  3. सूचना का अधिकार – लोकतांत्रिक देशों में नागरिकों को सरकार तथा उसके काम-काज के बारे में जानकारी पाने | का अधिकार प्राप्त है। यदि कोई नागरिक यह जानना चाहे कि फैसले लेने में नियमों का पालन हुआ है या नहीं तो वह इसका पता कर सकता है। उसे यह न सिर्फ जानने का अधिकार है बल्कि उसके पास इसके साधन भी उपलब्ध

लोकतांत्रिक व्यवस्था में एक ऐसी सरकार का गठन होता है जो कायदे-कानून को मानती है और लोगों के प्रति जवाबदेह होती है। लोकतांत्रिक सरकार नागरिकों को निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदार बनाने और खुद को उनके प्रति जवाबदेह बनाने वाली कार्यविधि भी विकसित कर लेती है। इस प्रकार लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था निश्चित रूप से अन्य शासनों से बेहतर है, यह वैध शासन व्यवस्था है, इसलिए पूरी दुनिया में लोकतंत्र के विचार के प्रति समर्थन का भाव है।

पाठ 7 लोकतंत्र के परिणाम प्रश्न 2. लोकतंत्र किन स्थितियों में सामाजिक विविधता को सँभालता है और उनके बीच सामंजस्य बैठाता है?
उत्तर लोकतांत्रिक व्यवस्थाएँ अनेक तरह के सामाजिक विभाजनों को सँभालती है। इससे इन टकरावों के विस्फोटक या हिंसक रूप लेने का अंदेशा कम हो जाता है। कोई भी समाज अपने विभिन्न समूहों के बीच के टकरावों को स्थायी तौर पर खत्म नहीं कर सकता। इनके बीच बातचीत से सामंजस्य बैठाने का तरीका विकसित कर सकते हैं। सामाजिक अंतर, विभाजन और टकरावों को सँभालना निश्चित रूप से लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक बड़ा गुण है। इसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को दो शर्तों को पूरा करना होता है

  • लोकतंत्र का अर्थ बहुमत की राय से शासन करना नहीं है। बहुमत को सदा ही अल्पमत का ध्यान रखना होता है। उसके साथ काम करने की जरूरत होती है तभी सरकार जन-सामान्य की इच्छा का प्रतिनिधित्व कर पाती है। बहुमत और अल्पमत की राय कोई स्थायी चीज नहीं होती।
  • बहुमत के शासन का अर्थ धर्म, नस्ल अथवा भाषायी आधार के बहुसंख्यक समूह का शासन नहीं होता। बहुमत के शासन का मतलब होता है कि हर फैसले या चुनाव में अलग-अलग लोग और समूह बहुमत का निर्माण कर सकते हैं। लोकतंत्र तभी तक लोकतंत्र रहता है जब तक, प्रत्येक नागरिक को किसी-न-किसी अवसर पर बहुमत का हिस्सा बनने का मौका मिलता है।

लोकतंत्र के परिणाम क्वेश्चन आंसर प्रश्न 3. निम्नलिखित कथनों के पक्ष या विपक्ष में तर्क दें

  1. औद्योगिक देश ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का भार उठा सकते हैं पर गरीब देशों को आर्थिक विकास करने के लिए तानाशाही चाहिए।
  2. लोकतंत्र अपने नागरिकों के बीच की असमानता को कम नहीं कर सकता।
  3. गरीब देशों की सरकार को अपने ज्यादा संसाधन गरीबी को कम करने, आहार, कपड़ा, स्वास्थ्य तथा शिक्षा पर लगाने की जगह उद्योगों और बुनियादी आर्थिक ढाँचे पर खर्च करने चाहिए।
  4. नागरिकों के बीच आर्थिक समानता अमीर और गरीब, दोनों तरह के लोकतांत्रिक देशों में है।
  5. लोकतंत्र में सभी को एक ही वोट का अधिकार है। इसका मतलब है कि लोकतंत्र में किसी तरह का प्रभुत्व और टकराव नहीं होता।

उत्तर
विपक्ष में तर्क

  1. औद्योगिक देश ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का भार उठा सकते हैं। पर गरीब देशों को आर्थिक विकास के लिए तानाशाही चाहिए। यह कथन सही नहीं है। गरीब देश आर्थिक विकास तानाशाही शासन में नहीं कर सकते क्योंकि तानाशाही शासन में न स्वतंत्रता होगी, न समानता, न राजनीतिक, आर्थिक अधिकार। ऐसे में गरीब देश आर्थिक विकास नहीं कर सकते।
  2. लोकतंत्र अपने नागरिकों के बीच की असमानता को कम कर सकता है क्योंकि लोकतंत्र में नागरिकों को राजनीतिक, सामाजिक तथा आर्थिक अधिकार प्राप्त होते हैं। इसके साथ ही लोकतंत्र समानता लाने के लिए कानून भी बना सकता है, जैसे-भारत में बहुत से कानूनों के माध्यम से सामाजिक, आर्थिक असमानता को कम करने की कोशिश की गई है।
  3. यह कथन सही नहीं है कि गरीब देशों को अपने संसाधन उद्योगों और बुनियादी ढाँचे पर खर्च करने चाहिए। गरीब देशों का लक्ष्य होना चाहिए पहले अपने देश के लोगों की आहार, कपड़ा, स्वास्थ्य तथा शिक्षा आदि बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करना। इसके बाद उद्योगों और बुनियादी ढाँचे पर खर्च करना चाहिए क्योंकि यदि लोग गरीब हैं तो वे उस मजबूत औद्योगिक और बुनियादी ढाँचे को संभाल नहीं पाएँगे। उसका सही उपयोग नहीं कर पाएँगे।
  4. नागरिकों के बीच आर्थिक समानता अमीर और गरीब दोनों तरह के लोकतांत्रिक देशों में है। ऐसा नहीं है। आर्थिक समानता अमीर और गरीब किसी देश में पूरी तरह से नहीं है। दोनों प्रकार के देशों में देश की कुल आये कुछ ही लोगों के हाथों में है। अमीर और गरीब के बीच एक बड़ी खाई देखने को मिलती है। फर्क इतना है कि गरीब देशों में गरीबों की संख्या बहुत ज्यादा होती है जबकि अमीर देशों में यह संख्या कुछ कम होती है।
  5. लोकतंत्र में सभी को एक ही वोट का अधिकार है। किंतु इसका यह मतलब नहीं कि किसी तरह का प्रभुत्व और टकराव नहीं होता है। सभी लोग एक ही वोट देते हैं किंतु जो लोग आर्थिक रूप से समर्थ हैं वे राजनीति में भी प्रभुत्व रखते हैं तथा समाज के विभिन्न वर्गों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है।

लोकतंत्र एक वैध शासन है कैसे प्रश्न 4. नीचे दिए गए ब्यौरों में लोकतंत्र की चुनौती की पहचान करें। ये स्थितियाँ किस तरह नागरिकों के गरिमापूर्ण, सुरक्षित और शांतिपूर्ण जीवन के लिए चुनौती पेश करती हैं। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए नीतिगत संस्थागत उपाय भी सुझाएँ

  1. उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उड़ीसा में दलितों और गैर-दलितों के प्रवेश के लिए अलग-अलग दरवाजा रखने वाले एक मंदिर को एक ही दरवाजे से सबको प्रवेश की अनुमति देनी पड़ी।
  2. भारत के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में किसान आत्महत्या कर रहे हैं।
  3. जम्मू कश्मीर के गंड़वारा में मुठभेड़ बताकर जम्मू कश्मीर पुलिस द्वारा तीन नागरिकों की हत्या करने के आरोप को देखते हुए इस घटना के जाँच के आदेश दिए।

उत्तर

  1. पहली घटना में जातिवाद की चुनौती लोकतंत्र के समक्ष है। इसके कारण समाज में रहने वाले कुछ लोगों को अपमान सहना पड़ता है। जिन जातियों को नीचा या अछूत या दलित कहा जाता है उन्हें जीवन की मूलभूत सुविधाओं से दूर रखा जाता है जो लोकतंत्र के खिलाफ हैं। ऐसे में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए कानून बनाकर, उन्हें कठोरता से लागू करके जातिवाद की समस्या से निपटना होगा।
  2. दूसरी घटना में लोकतंत्र के सामने गरीबी प्रमुख चुनौती है। गरीबी के कारण किसान कर्ज में डूबता चला जाता है और जब वह कर्जा चुकाने की स्थिति में नहीं होता तो वह आत्महत्या का रास्ता अपनाता है। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार को इन गरीब किसानों की मदद करनी होगी, उन्हें ऋण देने के लिए गाँवों में सरकारी बैंकों की स्थापना करनी होगी तथा कृषि के लिए आवश्यक चीजें कम कीमत पर उपलब्ध करानी होगी। जब तक गरीबी रहेगी तब तक लोकतंत्र मजबूत नहीं हो सकता क्योंकि एक गरीब व्यक्ति केवल दो समय की रोटी के जुगाड़ में लगा रहेगा। वह देश के हित में कुछ नहीं कर पाएगा।
  3. तीसरी घटना में सरकारी विभागों में फैला भ्रष्टाचार लोकतंत्र के सम्मुख एक चुनौती है। लोकतांत्रिक देशों में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार का बोलबाला है जिससे सत्ता में आए व्यक्ति अपनी सत्ता का प्रयोग अपने निजी हित के लिए करने लगते हैं। इससे नागरिकों का जीवन, संपत्ति संकट में पड़ जाते हैं। वे सरकारी अधिकारी जिनका काम नागरिकों की सेवा करना है वही लोग नागरिकों के शत्रु बन जाते हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक शासन की नींव हिल जाती है। लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए हर स्तर से भ्रष्टाचार को मिटाना होगा। इसके लिए कानून बनाने होंगे। उन्हें सख्ती से लागू करना होगा तथा सरकारी पदों पर नियुक्ति के समय निष्पक्षता से काम लेना होगा जिससे सही व्यक्ति महत्त्वपूर्ण पद प्राप्त कर सकें।

प्रश्न 5. लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के संदर्भ में इनमें से कौन-सा विचार सही है-लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं ने सफलतापूर्वक

  1. लोगों के बीच टकराव को समाप्त कर दिया है।
  2. लोगों के बीच की आर्थिक असमानताएँ समाप्त कर दी हैं।
  3. हाशिए के समूहों में कैसा व्यवहार हो, इस बारे में सारे मतभेद मिटा दिए गए हैं।
  4. राजनीतिक गैर बराबरी के विचार को समाप्त कर दिया है।

उत्तर 1. लोगों के बीच टकराव को समाप्त कर दिया है।

प्रश्न 6. लोकतंत्र के मूल्यांकन के लिहाज से इनमें कोई एक चीज लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के अनुरूप नहीं है। उसे चुनें

  1. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव
  2. व्यक्ति की गरिमा
  3. बहुसंख्यकों का शासन
  4. कानून से समक्ष समानता

उत्तर 1. बहुसंख्यकों का शासन।

प्रश्न 7. लोकतांत्रिक व्यवस्था के राजनीतिक और सामाजिक असमानताओं के बारे में किए गए अध्ययन बताते हैं कि

  1. लोकतंत्र और विकास साथ ही लगते हैं।
  2. लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में असमानताएँ बनी रहती हैं।
  3. तानाशाही में असमानताएँ नहीं होती।
  4. तानाशाही लोकतंत्र से बेहतर साबित हुई हैं।

उत्तर 2. लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में असमानताएँ बनी रहती हैं।

प्रश्न 8. नीचे दिए गए अनुच्छेद को पढ़ेः
नन्नू एक दिहाड़ी मजदूर है। वह पूर्वी दिल्ली की एक झुग्गी बस्ती वेलकम मजदूर कॉलोनी में रहता है। उसका राशन कार्ड गुम हो गया और जनवरी 2006 में उसने डुप्लीकेट राशन कार्ड बनाने के लिए अर्जी दी। अगले तीन महीनों तक उसने राशन विभाग के दफ्तर के कई चक्कर लगाए लेकिन वहाँ तैनात किरानी और अधिकारी उसका काम करने या उसके अर्जी की स्थिति बताने की कौन कहे उसको देखने तक के लिये तैयार न थे। आखिरकार उसने सूचना के अधिकार का उपयोग करते हुए अपनी अर्जी की दैनिक प्रगति का ब्यौरा देने का आवेदन किया। इसके साथ ही उसने इस अर्जी पर काम करने वाले अधिकारियों के नाम और काम न करने की सूरत में उनके खिलाफ़ होने वाली कार्रवाई का ब्यौरा भी माँगा। सूचना के अधिकार वाला आवेदन देने के हफ्ते भर के अंदर खाद्य विभाग को एक इंस्पेक्टर उसके घर आया और उसने नन्नू को बताया कि तुम्हारा राशन कार्ड तैयार है और तुम दफ्तर आकर उसे ले जा सकते हो। अगले दिन जब नन्नू राशन कार्ड लेने गया तो उस इलाके के खाद्य और आपूर्ति विभाग के सबसे बड़े अधिकारी ने गर्मजोशी से उसका स्वागत किया। इस अधिकारी ने उसे चाय की पेशकश की और कहा कि अब आपका काम हो गया है इसलिए सूचना के अधिकार वाला अपना आवेदन आप वापस ले लें।

नन्नू का उदाहरण क्या बताता है? नन्नू के इस आवेदन का अधिकारियों पर क्या असर हुआ? अपने माँ पिताजी से पूछिए कि अपनी समस्याओं के लिए सरकारी कर्मचारियों के पास जाने का उनका अनुभव कैसा रहा है?
उत्तर नन्नू का उदाहरण बताता है कि हर नागरिक को अपने अधिकारों का उचित प्रयोग करना चाहिए। सूचना नागरिकों को दिया गया एक महत्वपूर्ण अधिकार है जिसका प्रयोग करके नन्नू जैसा छोटे-से-छोटा व्यक्ति भी न्याय पा सकता है। जब सभी नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे तथा उनका समय पर उपयोग करेंगे तभी लोकतांत्रिक व्यवस्था ठीक ढंग से काम करेगी।

नन्नू के आवेदन का अधिकारियों पर गहरा असर हुआ और वे एकदम हरकत में आ गए। उन्होंने एक हफ्ते में ही उसका नया राशन कार्ड बना दिया। जिस राशन के दफ्तर मे नन्नू की कोई सनुवाई नहीं थी, उस दफ्तर में बड़े अधिकारी उससे मिले तथा पूरा सम्मान दिया और उससे आवेदन वापस लेने का निवेदन भी किया।

अब विद्यार्थी अपने माता-पिता से पूछे कि अपनी समस्याओं के लिए सरकारी कर्मचारियों के पास उनका अनुभव कैसा रहा। इसके विषय में वे एक विवरण भी लिखें।

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NCERT Solutions for Class 10 Social Science Economics Chapter 4 Globalisation and the Indian Economy (Hindi Medium)

NCERT Solutions for Class 10 Social Science Economics Chapter 4 Globalisation and the Indian Economy (Hindi Medium)

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Vaishvikaran Aur Bhartiya Arthvyavastha Question Answer

Vaishvikaran Se Aap Kya Samajhte Hain Apne Shabdo Mein Spasht Kijiye (What Is Globalisation In Hindi)

Class 10 Economics Chapter 4 In Hindi प्रश्न अभ्यास

पाठ्यपुस्तक से

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिएप्रश्न

वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए प्रश्न 1. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों से स्पष्ट कीजिए।
उत्तर वैश्वीकरण का अर्थ एक ऐसी व्यवस्था से है जिसमें किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की अन्य अर्थव्यवस्थाओं से विदेशी व्यापार एवं विदेशी निवेश द्वारा जोड़ा जाता है। वैश्वीकरण के कारण आज विश्व में विभिन्न देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, तकनीकी तथा श्रम का आदान-प्रदान हो रहा है। इस कार्य में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं जब वे अपनी इकाइयाँ संसार के विभिन्न देशों में स्थापित करती हैं।

प्रश्न 2. भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?
उत्तर स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर प्रतिबंध लगा रखा था। विदेशी प्रतिस्पर्धा से देश के उत्पादकों को संरक्षण प्रदान करने के लिए इसे अनिवार्य माना गया। 1950 एवं 1960 के दशक में उद्योगों की स्थापना हुई और इस अवस्था में इन नवोदित उद्योगों को आयात में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति नहीं दी गई। इसलिए भारत ने केवल अनिवार्य चीजों, जैसे–मशीनरी, उर्वरक और पेट्रोलियम के आयात की ही अनुमति दी।

सन् 1991 में आर्थिक नीति में परिवर्तन किया गया। सरकार ने निश्चय किया कि भारतीय उत्पादकों को विश्व के उत्पादकों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी जिससे देश के उत्पादकों के प्रदर्शन में सुधार होगा और वे अपनी गुणवत्ता में सुधार करेंगे। इसलिए विदेशी व्यापार एवं निवेश पर से अवरोधकों को काफी हद तक हटा दिया गया। इसका अर्थ है कि वस्तुओं का सुगमता से आयात किया जा सकेगा और विदेशी कंपनियाँ यहाँ अपने कार्यालय और कारखाने स्थापित कर सकेंगी। सरकार द्वारा अवरोधकों एवं प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया को ही उदारीकरण कहते हैं।

प्रश्न 3. श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?
उत्तर श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को महत्त्वपूर्ण मदद देगा । श्रम कानूनों में लचीलापन से बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किसी
देश में निवेश करेंगी। जिससे नए उद्योग स्थापित होंगे, नए रोजगारों का सृजन होगा तथा साथ ही इन उद्योगों को कच्चे माल की आपूर्ति करने वाली स्थानीय कंपनियों का विस्तार होगा और उत्पादन प्रक्रिया का आधुनिकीकरण भी होगा। श्रम कानूनों में लचीलेपन के बाद अनेक भारतीय कंपनियों को लाभ हुआ। इन कंपनियों ने अपने उत्पादक मानकों को ऊँचा उठाया। कुछ ने विदेशी कंपनियों के साथ सफलतापूर्वक सहयोग करके लाभ अर्जित किया।

प्रश्न 4. दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किस प्रकार उत्पादन पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?
उत्तर बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ वे कंपनियाँ हैं जो एक से अधिक देशों में उत्पादन पर नियंत्रण अथवा स्वामित्व रखती हैं। ये कंपनियाँ उन देशों में अपने कारखाने स्थापित करती हैं जहाँ उन्हें सस्ता श्रम एवं अन्य साधन मिल सकते हैं। जहाँ सरकारी नीतियाँ भी उनके अनुकूल हों। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ इन देशों की स्थानीय कपंनियों के साथ संयुक्त रूप से उत्पादन करती हैं, लेकिन अधिकांशतः बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ स्थानीय कंपनियों को खरीदकर उत्पादन का प्रसार करती हैं। जैस-एक अमेरिकी

बहुराष्ट्रीय कंपनी ‘कारगिल फूड्स’ ने अत्यंत छोटी भारतीय कंपनी ‘परख फूड्स’ को खरीद लिया है। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ एक अन्य तरीके से उत्पादन नियंत्रित करती हैं। विकसित देशों में बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों को उत्पादन का आदेश देती हैं। वस्त्र, जूते-चप्पल एवं खेल के सामान ऐसे उद्योग हैं, जिनका विश्वभर में बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों द्वारा उत्पादन किया जाता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इनकी आपूर्ति कर दी जाती है, जो अपने
ब्रांड नाम से इसे ग्राहकों को बेचती हैं।

प्रश्न 5. विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं? क्या आप मानते हैं कि विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी माँग करनी चाहिए?
उत्तर विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण चाहते हैं। इनका मानना है कि विदेश
व्यापार और विदेशी निवेश पर सभी अवरोधक हानिकारक हैं। इसलिए कोई अवरोधन नहीं होना चाहिए। देशों के बीच मुक्त व्यापार होना चाहिए। विश्व के सभी देशों को अपनी नीतियाँ उदार बनानी चाहिए। इसके लिए विकसित देशों की पहल पर विश्व व्यापार संगठन बनाया गया जो अंतर्राष्ट्रीय व्यापार से संबंधित नियम लागू करता है। विश्व व्यापार संगठन के नियमों के कारण विकासशील देश व्यापार अवरोधकों को हटाने के लिए विवश हुए हैं जबकि विकसित देशों ने अनुचित ढंग से व्यापार अवरोधकों को बरकरार रखा है।

विकासशील देश समय-समय पर विकसित देशों की सरकार से प्रश्न पूछते हैं कि उन्होंने विश्व व्यापार संगठनों के नियमों को ताक पर रखकर अपने देश में अवरोधक बना रखे हैं। क्या यह मुक्त और न्यायसंगत है?यदि विकासशील देश विश्व व्यापार संगठनों के नियमों को मानकर अवरोधकों को हटा रहे हैं तो विकसित देशों को भी अवरोधकों को हटाना
होगा।

प्रश्न 6. ‘वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है। इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।
उत्तर विभिन्न देशों के बीच परस्पर संबंध और तीव्र एकीकरण की प्रक्रिया ही वैश्वीकरण है। वैश्वीकरण का विश्व के सभी
देशों पर गहरा प्रभाव पड़ा किंतु यह प्रभाव एक समान नहीं है। स्थानीय एवं विदेशी उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धाओं में धनी वर्ग के उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है। इन उपभोक्ताओं के समक्ष पहले से अधिक विकल्प हैं और वे अनेक उत्पादों की उत्कृष्टता, गुणवत्ता और कम कीमत से लाभान्वित हो रहे हैं। परिणामतः ये लोग पहले की अपेक्षा एक उच्चतर जीवन स्तर का उपभोग कर रहे हैं।

वैश्वीकरण से बड़ी संख्या में छोटे उत्पादकों और कर्मचारियों को कई चुनौतियों का सामना कंरना पड़ा है। बैटरी, प्लास्टिक, खिलौने, टायर, डेयरी उत्पाद एवं खाद्य तेल के उद्योग कुछ ऐसे उदाहरण हैं, जहाँ प्रतिस्पर्धा के कारण छोटे निर्माता टिक नहीं सके। कई इकाइयाँ बंद हो गईं। जिसके चलते अनेक श्रमिक बेरोजगार हो गए। वैश्वीकरण और प्रतिस्पर्धा के दबाव ने श्रमिकों के जीवन को व्यापक रूप से प्रभावित किया। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण श्रमिकों का रोजगार लंबे समय के लिए सुनिश्चित नहीं रहा। वैश्वीकरण के कारण मिले लाभ में श्रमिकों को न्यायसंगत हिस्सा नहीं मिला। ये सभी प्रमाण संकेत करते हैं कि वैश्वीकरण सभी के लिए लाभप्रद नहीं रहा है। शिक्षित, कुशल और संपन्न लोगों ने वैश्वीकरण से मिले नए अवसरों का सर्वोत्तम उपयोग किया है। दूसरी ओर अनेक लोगों को लाभ में हिस्सा नहीं मिला

वैश्वीकरण प्रक्रिया में बहुराष्ट्रीय कंपनियों की क्या भूमिका है प्रश्न 7. व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाती है?
उत्तर सरकार द्वारा व्यापार पर से अवरोधकों अथवा प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया को ही उदारीकरण कहा जाता है। सरकार व्यापार अवरोधक का प्रयोग विदेश व्यापार में वृद्धि या कटौती करने के लिए कर सकती है। सरकार द्वारा उदारीकरण करने से वस्तुओं का आयात-निर्यात सुगमता से किया जा सकेगा तथा विदेशी कंपनियाँ भी अपने कार्यालय और कारखाने खोल सकेंगी। व्यापार के उदारीकरण से व्यवसायियों को मुक्त रूप से निर्णय लेने की अनुमति मिल जाती है कि वे क्या आयात या निर्यात करना चाहते हैं। विश्व के सभी देशों को अपनी नीतियाँ उदार बनानी होंगी तभी वैश्वीकरण को बढ़ावा मिलेगा।

प्रश्न 8. विदेश व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में किस प्रकार मदद करता है? यहाँ दिए गए उदाहरण से भिन्न उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।, विदेशी व्यापार के उदारीकरण से आप क्या समझते हैं
उत्तर विदेशी व्यापार विभिन्न देशों के बाजारों के एकीकरण में निम्नलिखित प्रकार से मदद करता है

  1. विदेशी व्यापार के कारण घरेलू उत्पादकों को अन्य देशों के बाजारों में पहुँचने का अवसर मिलता है। इससे उत्पादक अपने देश के बाजारों के साथ-साथ विश्व के बाजारों से भी प्रतियोगिता कर सकता है।
  2. ग्राहकों को विदेशी व्यापार के कारण सबसे अधिक लाभ रहता है। अब उन्हें विभिन्न प्रकार की चीजें अपने देश में ही उपलब्ध होने लगती हैं।

उदाहरण के लिए भारतीय कंप्यूटर बाजार में विदेशी कंपनियों के प्रवेश से भारतीय तथा विदेशी कंपनियों में प्रतिस्पर्धा होगी। यदि विदेशी कंपनियों के कंप्यूटर बेहतर साबित होंगे तो भारतीय उपभोक्ता के सामने अधिक
विकल्प उपलब्ध होंगे। भारतीय कंपनियाँ भी अपनी हानि को कम करने के लिए अपने उत्पाद की गुणवत्ता और
कीमतों में सुधार करेंगी अन्यथा वे प्रतियोगिता से बाहर हो जाएँगी।

प्रश्न 9. वैश्वीकरण भविष्य में जारी रहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा? अपने उत्तर का कारण दीजिए।
उत्तर मेरे अनुसार आज से बीस वर्ष बाद भी वैश्वीकरण न केवल जारी रहेगा बल्कि वह अपने चरम पर होगा। विश्व के विभिन्न
देशों की अर्थव्यवस्थाएँ एक-दूसरे से जुड़ी होंगी। उनमें वस्तुओं, सेवाओं, तकनीकी तथा श्रमिकों का आदान-प्रदान बहुत अधिक होगा । बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ विभिन्न देशों में अधिक-से-अधिक निवेश करेंगी। विदेशी व्यापार का अधिकांश हिस्से पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नियंत्रण होगा। इस अवस्था में वैश्वीकरण के कारण व्यापार तथा निवेश के क्षेत्र में विभिन्न देशों में एकीकरण में वृद्धि होगी। एक देश की तकनीक, पूँजी तथा श्रम दूसरे देश के काम आने लगेंगे जिससे विश्व अर्थव्यवस्था का विकास होगा।

प्रश्न 10. मान लीजिए कि आप दो लोगों को तर्क करते हुए पाते हैं-एक कह रहा है कि वैश्वीकरण ने हमारे देश के विकास को क्षति पहुँचाई है, दूसरा कह रहा है कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में सहायता की है। इन लोगों को आप कैसे जवाब देगें?
उत्तर वैश्वीकरण का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा है। यह प्रभाव सकारात्मक भी रहा तथा नकारात्मक भी।
इसलिए कुछ लोग मानते हैं कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में मदद पहुँचाई है तथा कुछ लोग मानते हैं कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास को क्षति पहुँचाई। मेरा विचार है कि वैश्वीकरण से भारतीय अर्थव्यवस्था का विकास हुआ है। लोगों को नई व उन्नत तकनीक की वस्तुएँ तथा बेहतर रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। किंतु ये विकास असमान रहा अर्थात् इसने बड़े-बड़े उद्योगपतियों, शिक्षित व धनी उत्पादकों व धनी उपभोक्ताओं को तो लाभ पहुँचाया किंतु छोटे उद्योगपतियों, सुशीला जैसे श्रमिकों तथा विकासशील देशों को नुकसान पहुँचाया । वैश्वीकरण के कारण बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने भारत में कई लघु व कुटीर उद्योगों को लगभग नष्ट कर दिया है। श्रम कानूनों में, वैश्वीकरण के कारण बहुत लचीलापन आ गया जिससे लोगों का रोजगार अनिश्चित हो गया है।

अब जबकि वैश्वीकरण अनिवार्य विकल्प है तो सरकार द्वारा वैश्वीकरण को अधिक न्यायसंगत और सर्वव्यापी बनाने की आवश्यकता है ताकि इसका लाभ कुछ लोगों तक ही सीमित न रहे। सरकार को छोटे उद्योगपतियों को सस्ते दामों पर ऋण देकर, बेहतर बिजली की सुविधाएँ देकर विदेशी प्रतिस्पर्धा के योग्य बनाना चाहिए। विकासशील देशों को
विकसित देशों पर अपने व्यापार और निवेश का उदारीकरण करने का दबाव डालना चाहिए।

प्रश्न 11. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
दो दशक पहले की तुलना में भारतीय खरीददारों के पास वस्तुओं के अधिक विकल्प हैं। यह…………….‘की प्रक्रिया से नजदीक से जुड़ा हुआ है। अनेक दूसरे देशों में उत्पादित वस्तुओं को भारत के बाजारों में बेचा जा रहा है। इसका अर्थ है कि अन्य देशों के साथः………………बढ़ रहा है। इससे भी आगे भारत में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित ब्रांडों की बढ़ती संख्या हम बाजारों में देखते हैं। बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं क्योंकि………………: । जबकि बाज़ार में उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्प इसलिए बढ़ते……….और…………के प्रभाव का अर्थ है। उत्पादकों के बीच अधिकतम:…………….।
उत्तर वैश्वीकरण, विदेशी व्यापार, यहाँ उन्हें उचित परिस्थितियाँ मिल रही हैं, जैसे—बड़ा बाजार, सस्ते श्रमिक आदि, निर्यात,
उदारीकरण, प्रतिस्पर्धा।

प्रश्न 12. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए

(क) बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ छोटे उत्पादकों से सस्ते दरों
(ख) आयात पर कर और कोटा का उपयोग, व्यापार
(ग) विदेशों में निवेश करने वाली भारतीय कंपनियाँ।
(घ) आई०टी० ने सेवाओं के उत्पादन के प्रसार में सहायता की है।
(ङ) अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियों ने उत्पादन करने के लिए निवेश किया है।

(अ) मोटर गाड़ियों पर खरीदती हैं।
(ब) कपड़ा, जूते-चप्पल, खेल के सामान नियमन के लिए किया जाता है।
(स) कॉल सेंटर
(द) टाटा मोटर्स, इंफोसिस, रैनबैक्सी
(य) व्यापार अवरोधक

उत्तर (क) ब (ख) य (ग) द (घ) स (ङ) अ।।

प्रश्न 13. सही विकल्प का चयन कीजिए
(अ) वैश्वीकरण के विगत दो दशकों में द्रुत आवागमन देखा गया है

(क) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और लोगों का
(ख) देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेशों का
(ग) देशों के बीच वस्तुओं, निवेशों और लोगों का ।

(आ) विश्व के देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा निवेश का सबसे अधिक सामान्य मार्ग है

(क) नए कारखानों की स्थापना
(ख) स्थानीय कंपनियों को खरीद लेना।
(ग) स्थानीय कंपनियों से साझेदारी करना।

(इ) वैश्वीकरण ने जीवन-स्तर के सुधार में सहायता पहुँचाई है

(क) सभी लोगों के
(ख) विकसित देशों के लोगों के
(ग) विकसित देशों के श्रमिकों के
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर (अ) (क) (आ) (ख) (इ) (ख)।

अतिरिक्त परियोजना/कार्य कलाप

प्रश्न 1. कुछ ब्रांडेड उत्पादों को लीजिए, जिनका हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं (साबुन, टूथपेस्ट, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएँ इत्यादि)। जाँच कीजिए कि इनमें से कौन-कौन बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा उत्पादित हैं।
उत्तर    निर्देशन: विद्यार्थी इस परियोजना कार्य को स्वयं करें। वे समाचार-पत्रों, पुस्तकों, चित्रों, टेलीविजन, इंटरनेट से लाभ उठा सकते हैं। इस परियोजना कार्य को करने के बाद विद्यार्थी वैश्वीकरण के अर्थ व व्यवहारिक रूप को भली-भाँति समझ पाएँगें।

प्रश्न 2. अपनी पसंद के किसी भी भारतीय उद्योग या सेवा को लीजिए। उद्योग के निम्नलिखित पहलूओं पर लोगों के साक्षात्कारों, समाचार-पत्रों एवं पत्रिकाओं की कतरनों, पुस्तकों, दूरदर्शन एवं इंटरनेट से जानकारियाँ और फोटो संकलित कीजिए

(क) उद्योग में विविध उत्पादक/कंपनियाँ।
(ख) क्या उत्पाद अन्य देशों को निर्यात होता है?
(ग) क्या उत्पादकों के बीच बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हैं?
(घ) उद्योग में प्रतिस्पर्धा।
(ङ) उद्योग में कार्य-परिस्थितियाँ।
(च) क्या विगत पंद्रह वर्षों में उद्योग में कोई बड़ा बदलाव आया है?
(छ) उद्योग में कार्यरत लोगों की समस्याएँ।

उत्तर विद्यार्थी इस परियोजना कार्य को भी स्वयं करें।

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